कल्पेश्वर महादेव मंदिर परिसर में भारी भूस्खलन, 25 लाख की संपत्ति को नुकसान; बड़ा हादसा टला

कल्पेश्वर महादेव मंदिर परिसर में भारी भूस्खलन, 25 लाख की संपत्ति को नुकसान; बड़ा हादसा टला

ऊखीमठ। पंचम केदार के प्रसिद्ध कल्पेश्वर महादेव मंदिर परिसर में सोमवार शाम भारी बारिश के बाद अचानक भूस्खलन होने से अफरा-तफरी मच गई। पहाड़ी से बड़ी मात्रा में मलबा और मिट्टी खिसककर मंदिर परिसर में आ गई, जिससे अतिरिक्त कक्ष और शेड इसकी चपेट में

ऊखीमठ। पंचम केदार के प्रसिद्ध कल्पेश्वर महादेव मंदिर परिसर में सोमवार शाम भारी बारिश के बाद अचानक भूस्खलन होने से अफरा-तफरी मच गई। पहाड़ी से बड़ी मात्रा में मलबा और मिट्टी खिसककर मंदिर परिसर में आ गई, जिससे अतिरिक्त कक्ष और शेड इसकी चपेट में आ गए। घटना में करीब 25 लाख रुपये की संपत्ति के नुकसान का अनुमान है। राहत की बात यह रही कि भूस्खलन के समय मंदिर के अतिरिक्त कक्षों में कोई मौजूद नहीं था, जिससे जनहानि होने से बच गई।

जानकारी के अनुसार, सोमवार शाम करीब साढ़े छह बजे क्षेत्र में तेज बारिश हो रही थी। इसी दौरान अचानक पहाड़ी से भारी मात्रा में मलबा खिसककर मंदिर परिसर की ओर आ गया। देखते ही देखते मलबे ने मंदिर के अतिरिक्त कक्ष और शेड को अपनी चपेट में ले लिया। परिसर में रखी आवश्यक सामग्री, सीढ़ियां, बिजली के खंभे और अन्य सामान मलबे में दब गया।

भूस्खलन के बाद मंदिर परिसर में बड़ी मात्रा में मलबा जमा हो गया। इससे परिसर के कुछ हिस्सों को भी नुकसान पहुंचा है। घटना की जानकारी मिलते ही स्थानीय लोग मौके पर पहुंचे और स्थिति का जायजा लिया। प्रारंभिक आकलन के अनुसार, घटना में करीब 25 लाख रुपये की संपत्ति के नुकसान की बात सामने आ रही है।

कर्मचारियों के बाहर होने से टला बड़ा हादसा

भूस्खलन के दौरान मंदिर के कर्मचारी अतिरिक्त कक्षों से बाहर निकल चुके थे। यदि उस समय कर्मचारी अंदर मौजूद होते तो बड़ा हादसा हो सकता था। समय रहते उनके बाहर निकल जाने के कारण घटना में किसी प्रकार की जनहानि नहीं हुई।

सुरक्षा इंतजाम बढ़ाने की मांग

घटना के बाद स्थानीय लोगों ने प्रशासन से मंदिर परिसर का स्थलीय निरीक्षण कराने और भूस्खलन से हुए नुकसान का विस्तृत आकलन कराने की मांग की है। साथ ही मलबा हटाने के साथ ही भविष्य में ऐसी घटनाओं से बचाव के लिए मंदिर परिसर में सुरक्षा के पुख्ता इंतजाम किए जाने की मांग उठाई गई है।

भारी बारिश के दौरान पहाड़ी क्षेत्रों में भूस्खलन का खतरा लगातार बना हुआ है। ऐसे में स्थानीय लोगों ने प्रशासन से संवेदनशील स्थानों की निगरानी बढ़ाने और समय रहते आवश्यक सुरक्षात्मक कदम उठाने की अपील की है।

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